Nov 12

आस्था – Astha

जब मैं पत्थर के सामने सर झुकाता हूँ, तो मन में सवाल यह नहीं होता की पत्थर में भगवान हैं कि नहीं   सवाल यह होता है कि, मैं अपनी आस्था और विश्वास से उस पत्थर में भगवान देख सकता हूँ कि नहीं   जब जब उसे आस्था के साथ ढूंढ़ता हूँ वो मिल जाते…

May 24

चिट्ठियाँ- Chitthiyan

पुरानी चिट्ठियों की उम्र पल पल बढ़ती रही वक़्त की झुर्रियाँ उन पर बेल सी चढ़तीं रहीं कल खोला जो मैंने बक्स अपनी यादों का गर्त के नीचे की दुनिया अब तलक बदली नहीं वो बात, वो ज़ज़्बात, वही खुशबू है अब तलक उनमें वही मैं हूँ, वही तू है गर्त चिट्ठियों पे भले ही…

May 14

तक़दीर – Taqdeer

हाँथ तेरे कुछ नहीं तो क्या वक़्त कभी भी बदल सकता है तू ना समेटना दामन अपना आसमां कभी भी बरस सकता है इन हाथों की लकीरों पे मत जा तक़दीर तू खुद भी बदल सकता है Hanth tere kuch nahin to kya Waqt kabhi bhi badal sakta hae Tu na sametna daman apna Aasman kabhi bhi baras sakta hae In hantho ki lakiron pe…

May 02

खयालों के हिस्से- Parts of Dreams

दिन भर खयालों के सिलसिले होते हैं उन खयालों में कई किस्से होते हैं कुछ लोग उन किस्सों में अक्सर होते हैं कब कौन सा ख़याल करा दे उनकी याद और उनकी याद करा दे क्या क्या याद रात सपने बदलने को, करवटें बदलते हैं वो मिले न मिले, खबर मिले न मिले उनका ज़िक्र…

Apr 02

आबरू-ऐ-शब

पत्तों पे ओस अब तक बाकी है आबरू-ऐ-शब कल फिर बिखरी होगी हम सोते रहे सन्नाटों में यहाँ बाहर, शब एक उम्र सी गुज़री होगी    Patton pe os ab tak baki hai Aabroo-e-shab kal fir bikhri hogi Hum sote rahe sannaton mein yahan Bahar, Shab ek umr si guzari hogi  

Mar 10

पुरानी चिट्ठियाँ

दर्द था, कशिश थी या दबे ज़ज़्बात कुछ तो था जो भूले नहीं वो बात एक एक लम्हा याद आ गया कल जब पुरानी चिट्ठियों पे पड़ गया हाथ   यूं तो गुमशुदा हूँ आज की ज़िंदगी में पर पुराने तार शायद बंधे हें साथ या फिर भरी होगी बीती ज़िंदगी उनमें जब भी खोलो, वही बात, वही ज़ज़्बात     Dard tha, kashish thi, ya dabe zazbaat Kuchh to…

Mar 07

ऐसे फेंको आज गुलाल

आज उठा के दोनो हाथ, फेको इतना तेज गुलाल कर दे तेरा तन मन लाल, कर दे मेरा तन मन लाल   छोड़ छाड़ के सारे शिकवे, इर्षा, कुंठा और मलाल ना तेरा ना मेरा हो कुछ, ऐसे नाचे एक ही ताल पकड़ पकड़ के सब को रंग दो, बच ना जाये एक भी गाल…

Feb 23

Aagosh- आगोश

ज़िंदगी भर बनाया घर अपना फिर भी लगा कुछ बाकी है तेरी आगोश में आके जाना रहने को इतनी सी जगह काफी है   zindagi bhar banaya ghar apna Fir bhi laga kuchh baki hai Teri aagosh mein aa ke jana Rahne ko itni si jagah kafi hai

Feb 19

मुहब्बत जो हो गयी हमसफर से

बनके मिठास जो घुल गयी शरबतोँ सी | या धीमी आंच पे पकी खीर सी है || ये मुहब्बत जो हो गयी हमसफर से  | खुदा को पहुचे वो कलमा-ए-पीर सी है ||   राहों को कहाँ होगी राहे मंजिल की ख़बर | वो खुद राहगीरों तले कुचली है || हमसफर से मिलता है मंजिलों का…

Feb 14

मन के बोल

तेरी गोदी में सर रख के बंधन सारे दिये थे खोल खुले बालों के बादलों ने कहे थे तेरे मन के बोल   तुम भी चुप थी, मैं भी चुप था, स्पर्श अहसास मगर प्रबल था अर्थ कर्म से क्षीण बदन का, अब अंतर्मन ज्यूं श्वेत कमल था    भोर में जागे तरल ताल पे…

Older posts «

» Newer posts