Tag Archive: sher

Apr 02

आबरू-ऐ-शब

पत्तों पे ओस अब तक बाकी है आबरू-ऐ-शब कल फिर बिखरी होगी हम सोते रहे सन्नाटों में यहाँ बाहर, शब एक उम्र सी गुज़री होगी    Patton pe os ab tak baki hai Aabroo-e-shab kal fir bikhri hogi Hum sote rahe sannaton mein yahan Bahar, Shab ek umr si guzari hogi  

Mar 10

पुरानी चिट्ठियाँ

दर्द था, कशिश थी या दबे ज़ज़्बात कुछ तो था जो भूले नहीं वो बात एक एक लम्हा याद आ गया कल जब पुरानी चिट्ठियों पे पड़ गया हाथ   यूं तो गुमशुदा हूँ आज की ज़िंदगी में पर पुराने तार शायद बंधे हें साथ या फिर भरी होगी बीती ज़िंदगी उनमें जब भी खोलो, वही बात, वही ज़ज़्बात     Dard tha, kashish thi, ya dabe zazbaat Kuchh to…

Mar 07

ऐसे फेंको आज गुलाल

आज उठा के दोनो हाथ, फेको इतना तेज गुलाल कर दे तेरा तन मन लाल, कर दे मेरा तन मन लाल   छोड़ छाड़ के सारे शिकवे, इर्षा, कुंठा और मलाल ना तेरा ना मेरा हो कुछ, ऐसे नाचे एक ही ताल पकड़ पकड़ के सब को रंग दो, बच ना जाये एक भी गाल…

Feb 23

Aagosh- आगोश

ज़िंदगी भर बनाया घर अपना फिर भी लगा कुछ बाकी है तेरी आगोश में आके जाना रहने को इतनी सी जगह काफी है   zindagi bhar banaya ghar apna Fir bhi laga kuchh baki hai Teri aagosh mein aa ke jana Rahne ko itni si jagah kafi hai

Feb 19

मुहब्बत जो हो गयी हमसफर से

बनके मिठास जो घुल गयी शरबतोँ सी | या धीमी आंच पे पकी खीर सी है || ये मुहब्बत जो हो गयी हमसफर से  | खुदा को पहुचे वो कलमा-ए-पीर सी है ||   राहों को कहाँ होगी राहे मंजिल की ख़बर | वो खुद राहगीरों तले कुचली है || हमसफर से मिलता है मंजिलों का…

Feb 14

मन के बोल

तेरी गोदी में सर रख के बंधन सारे दिये थे खोल खुले बालों के बादलों ने कहे थे तेरे मन के बोल   तुम भी चुप थी, मैं भी चुप था, स्पर्श अहसास मगर प्रबल था अर्थ कर्म से क्षीण बदन का, अब अंतर्मन ज्यूं श्वेत कमल था    भोर में जागे तरल ताल पे…

Feb 04

कश्ती और साहिल

जब लड़के तूफानों से कश्ती साहिल पे लौट आयेगी किनारे को लगाके गले अपने सारे किस्से सुनाएगी किनारे ने भी तो टटोले थे लहरों के दामन कश्ती को ढूंढने में उसने भी रात बिताई थी और जब तूफानों ने दी थी दस्तक खाके सीने पे एक एक मौज मिटाई थी Jab ladke tufano se kashti sahil…

Feb 03

अपनों का हो साथ तो आसान ज़िंदगी

  माँ की देन, पिता का आशीर्वाद ज़िंदगी हमसफर के रास्ते का साथ ज़िंदगी भाई ने दिया बड़े होने का अहसास ज़िंदगी बहन का भाई पे अभिमान ज़िंदगी बच्चों की किलकारियों में सब सार ज़िंदगी दोस्तों की बातों में संसार ज़िंदगी कहने को तो मुश्किल-ओ-परेशान ज़िंदगी अपनों का हो साथ तो आसान ज़िंदगी   Ma ki…

Feb 01

Man ki batein

Jan 30

कारवाँ चल रहा खुद ही के लिये

लहू ज़िगर का बहे या आँखों का पानी कोई रुकता नहीं किसी के लिये कारवाँ सा लग रहा जो दूर से हर शख्स चल रहा है खुद ही के लिये   Lahu zigar ka bahe ya aankhon ka pani Koi rukta nahin kisi ke liye Karwan sa lag raha jo door se Har shakhs chal…

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